Srimad Valmiki Ramayanam Balakandam Sargam 16
Shlokas 21-24
21. तथेति नृपतिः प्रीतः शिरसा प्रतिगृह्य ताम् |
पात्रीं देवान्नसंपूर्णां देवदत्तां हिरण्मयीम् || १-१६-२१
22. अभिवाद्य च तद् भूतमद्भुतं प्रियदर्शनम् |
मुदा परमया युक्तश्चकाराभिप्रदक्षिणम् || १-१६-२२
23. ततो दशरथः प्राप्य पायसं देवनिर्मितम् |
बभूव परमप्रीतः प्राप्य वित्तमिवाधनः || १-१६-२३
24. ततस्तदद्भुतप्रख्यं भूतं परमभास्वरम् |
संवर्तयित्वा तत्कर्म तत्रैवान्तरधीयत || १-१६-२४
21. ததேதி ந்ரிபதிஃ ப்ரீதஃ ஶிரஸா ப்ரதிக்ரிஹ்ய தாம் |
பாத்ரீஂ தேவாந்நஸஂபூர்ணாஂ தேவதத்தாஂ ஹிரண்மயீம் ||
22. அபிவாத்ய ச தத் பூதமத்புதஂ ப்ரியதர்ஶநம் |
முதா பரமயா யுக்தஶ்சகாராபிப்ரதக்ஷிணம் ||
23. ததோ தஶரதஃ ப்ராப்ய பாயஸஂ தேவநிர்மிதம் |
பபூவ பரமப்ரீதஃ ப்ராப்ய வித்தமிவாதநஃ ||
24. ததஸ்ததத்புதப்ரக்யஂ பூதஂ பரமபாஸ்வரம் |
ஸஂவர்தயித்வா தத்கர்ம தத்ரைவாந்தரதீயத ||
Jai Shri Ram 🙏
Monday, November 6, 2023
Srimad Valmiki Ramayanam Balakandam Sargam 16 Shlokas 21-24
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